Haryanvi Jokes

Awesome Haryanvi Jokes

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जिनका बचपन गाँव म कटया सै उन सब ताहिं कविता ।

बचपन का टेम याद आ गया कितने काच्चे काटया करते,
आलस का कोए काम ना था भाजे भाजे हांड्या करते।

माचिस के ताश बणाया करते ,कित कित त ठा के लाया करते
मोर के चंदे ठाण ताहिं 4 बजे उठ के भाज जाया करते ।

ठा क तख्ती टांग क बस्ता स्कूल मे आपां जाया करते,
स्कूल के टेम पे मीह बरस ज्या सारी हाणा चाहया करते ।

गा के कविता सुनाके पहाड़े पिटण त बच जाया करते ,
राह म एक जोहड़ पड़े था उड़ै तख्ती पोत लाया करते ।

“राजा की रानी रुससे जा माहरी तख्ती सूखे जा”
कहके फेर सुखाया करते ,
नयी किताब आते ए हम उसपे जिलत चढाया करते।

सारे साल उस कहण्या फेर ना कदे खोल लखाया करते ,
बोतल की खाते आइसक्रीम हम बालां के मुरमुरे खाया करते ।

घरा म सबके टीवी ना था पड़ोसिया के देखण जाया करते
ज कोए हमने ना देखन दे फेर हेंडल गेर के आया करते।

भरी दोफारी महस खोलके जोहड़ पे ले के जाया करते ,
बैठ के ऊपर या पकड़ पूछ ने हम भी बित्तर बड़ जाया करते ।

साँझ ने खेलते लुहकम लुहका कदे आती पाती खेलया करते,
कदे चंदगी की ,कदे चंदरभान की डांटा न हम झेलया करते ।

बुआ आर काका भी माहरे खूब ए लाड़ लड़ाया करते ,
जब होती कदे पिटाई त बाबू धोरे छुड़वाया करते ।

खेता कहण्या जा के फेर नलके टूबेल प नहाया करते ,
चूल्हे धोरै बैठ के रोटी घी धर- धर क खाया करते।

होती फेर सोवण की तयारी दादा दादी कहानी सुनाया करते ,बिजली त कदे आवे ना थी बस बिजणा हलाया करते ।

हल्की हल्की सी हवा लागती हमते फेर सो जाया करते ,
तड़के न जब आँख खुलती सारे ऊट्ठे पाया करते ।

दूसरी खाटा के गुददड़े बत्ती सीले से पाया करते ,
छोड़के अपनी खाट न दूसरी पे हटके सो जाया करते ।

बचपन का टेम याद आ गया कितने काच्चे काटया करते ।

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